प्रस्तावित मंच का राष्ट्रीय सांगठनिक स्वरूप

गौसेवा के क्षेत्र में वैसे तो अनेक व्यक्ति / संस्थाएं क्रियाशील हैं। तथापि अपेक्षित फल-प्राप्ति के लिए इन सभी को एक छत्र के अंतर्गत लाने के महत् कार्य का सम्पादन करने हेतु एक मंच की आवश्यकता है जो :-

  • आधारभूत से क्रियाशील, समर्पित, समयदानी, तत्पर तथा अनुभवशाली गौभक्तों का संगठन हो।
  • सर्वमान्य तथा सर्वग्राह्य हो
  • सभी गौसेवारत व्यक्ति संस्था की आवश्यकतानुसार उन्हें सम्बन्धित आयाम हेतु मार्ग दर्शन, वातावरण सहयोग उपलब्ध कराने में सक्षम हो।

इस मंच में एक राष्ट्रीय दिग्दर्शक मंडल होगा जिसके अंतर्गत कुल 18 प्रकोष्ठ होंगे जो दिग्दर्शक मण्डल के मार्गदर्शन में गौमाता से सम्बन्धित विभिन्न कार्यों का सम्पादन करेंगे।

दिग्दर्शक मण्डलः-

यह संगठन के मौलिक उद्देश्य की पूर्ति के लिये आवश्यक, विभिन्न प्रकोष्ठों द्वारा लिये गये निर्णयों की समीक्षा कर उचित दिशा निर्देश देने के अतिरिक्त उनके बीच सेतु का कार्य करेगा। प्रकोष्ठों की आवश्यकताओं के अनुसार उनके बीच समन्वयन का कार्य सम्पादन करेगा। इसके अंतर्गत संसाधन वित्त सरकार और अन्य संस्थाओं से वार्ता तथा कार्य योजना के क्रियान्वयन का कार्यभार रहेगा। इस मण्डल के सदस्य भी समर्पित समयदानी तत्पर तथा अनुभवशाली गौभक्त होने के अतिरिक्त अपने-अपने क्षेत्र के गणमान्य और कार्य-निष्पादन में लब्धप्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।

18 प्रकोष्ठ -

राष्ट्रीय कार्यसमिति –

राष्ट्रीय दिग्दर्शक मंडल के सदस्य और 18 प्रकोष्ठों के संयोजकों को मिलाकर राष्ट्रीय कार्य समिति बनेगी। इस समिति में इनके अलावा कुछ आमंत्रित सदस्य भी आवश्यकतानुसार सम्मिलित किये जा सकते हैं।

  1. संगठन सुदृढ़ीकरण
  2. समस्याओं का अवलोकन
  3. समाधान का चिन्तन
  4. कार्य योजना
  5. क्रियान्वयन
  6. आवश्यक वित्तीय संसाधनों का विवरण व संग्रह